मैँ नही जानता कि, मैँ क्योँ लिखता हूँ,
बस, खाली पन्ने यूँ देखे नहीँ जाते,
इनसे ही अपना अकेलापन बाँट लेता हूँ...
मेरे ख़्यालोँ का आइना है ये,मेरी अनकही बातेँ मेरे अनसुने जज़्बात हैँ ये..
इनपर जो स्याही है, मेरे सपनोँ,मेरे छुपे आँसू,मेरे दर्द, मेरे प्यार कि हैँ..
इनपर मैँ पूरी तरह आजाद हूँ, इनपर न कोई रोक है न कोई टोक..
कभी भर देता हूँ इन्हे,दिये की लौ से,कभी बचपन की यादोँ से,कभी उस हसीन की तारीफ़ोँ से..
ये पन्ने कुछ जवाब नही देते,बस सुन लेते हैँ मेरी बात,कैद कर लेते हैँ खुद मेँ,
"मेरी दुनिया मेरे जज़्बात"
बस, खाली पन्ने यूँ देखे नहीँ जाते,
इनसे ही अपना अकेलापन बाँट लेता हूँ...
मेरे ख़्यालोँ का आइना है ये,मेरी अनकही बातेँ मेरे अनसुने जज़्बात हैँ ये..
इनपर जो स्याही है, मेरे सपनोँ,मेरे छुपे आँसू,मेरे दर्द, मेरे प्यार कि हैँ..
इनपर मैँ पूरी तरह आजाद हूँ, इनपर न कोई रोक है न कोई टोक..
कभी भर देता हूँ इन्हे,दिये की लौ से,कभी बचपन की यादोँ से,कभी उस हसीन की तारीफ़ोँ से..
ये पन्ने कुछ जवाब नही देते,बस सुन लेते हैँ मेरी बात,कैद कर लेते हैँ खुद मेँ,
"मेरी दुनिया मेरे जज़्बात"

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