Wednesday, 22 February 2017

एक आकर्षक पत्र

सिंगापुर में परीक्षा से पहले प्रिंसिपल ने बच्चों के पेरेंट्स को एक लेटर भेजा जो इस प्रकार है ,
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"डियर पेरेंट्स,
मैं जानता हूं आप इसको लेकर बहुत बेचैन हैं कि आपका बेटा इम्तिहान में अच्छा प्रदर्शन करें ,लेकिन ध्यान रखें कि यह बच्चे जो इम्तिहान दे रहे हैं इनमें भविष्य के अच्छे कलाकार भी हैं जिन्हें गणित समझने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, इनमें बड़ी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि भी बैठे हैं जिन्हें इंग्लिश लिटरेचर और इतिहास समझने की जरूरत नहीं है, इन बच्चों में भविष्य के बड़े-बड़े संगीतकार भी हैं जिनकी नजर में केमिस्ट्री के कम अंकों का कोई महत्व नहीं, इन सबका इनके भविष्य पर कोई असर नहीं पड़ने वाला इन बच्चों में भविष्य के एथलीट्स भी हैं जिनकी नजर में उनके मार्क्स से ज्यादा उन की फिटनेस जरूरी है| लिहाजा अगर आपका बच्चा ज्यादा नंबर लाता है तो बहुत अच्छी बात है लेकिन अगर वह ज्यादा नंबर नहीं ला सका तो तो आप बच्चे से उसका आत्मविश्वास और उसका स्वाभिमान ना छीन ले l अगर वह अच्छे नंबर ना ला सके तो आप उन्हें हौसला दीजिएगा की कोई बात नहीं यह एक छोटा सा इम्तिहान हैl वह तो जिंदगी में इससे भी कुछ बड़ा करने के लिए बनाए गए हैं l अगर वह कम मार्क्स लाते हैं तो आप उन्हें बता दें कि आप फिर भी इनसे प्यार करते हैं और आप उन्हें उन के कम अंको की वजह से जज नहीं करेंगे l ईश्वर के लिए ऐसा ही कीजिएगा और जब आप ऐसा करेंगे फिर देखिएगा कि आपका बच्चा दुनिया भी जीत लेगा l एक इम्तिहान और कम नंबर आपके बच्चे से इसके सपने और इसका टैलेंट नहीं छीन सकते और हां प्लीज ऐसा मत सोचिएगा कि इस दुनिया में सिर्फ डॉक्टर और इंजीनियर ही खुश रहते हैं "अपने बच्चों को एक. अच्छा इंसान बनने की शिक्षा दीजिये.केवल अंक ही बच्चों की योग्यता का मापदंड नही हैं.😊
                                    आपका प्रधानाचार्य

Sunday, 19 February 2017

समान काम समान वेतन



'समान काम समान वेतन' सभी कर्मचरियों का संवैधानिक अधिकार है। 26 अक्टूबर 2016, को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी प्रकार के कर्मचारी, चाहे वो स्थायी हों या अस्थायी, यदि वो समान काम करते हैं तो उन्हें समान वेतन मिलना चाहिए। लेकिन अफ़सोस की बात है कि बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले की अवहेलना कर रही है।
बिहार सरकार ने विभिन्न प्रक्रियाओं से पिछले डेढ़ दशक में बिहार में लगभग 4 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की है। ये शिक्षकों एक समान परिस्थितियों में एक समान कार्य करते हैं लेकिन इनके वेतन में  भारी असमानता है। जहाँ एक शिक्षक को 50-60 हज़ार रूपए वेतन मिलता है वहीँ दूसरे शिक्षक को मात्र 12 हज़ार रूपए। ये न केवल संवैधानिक अधिकारों का हनन है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के कथनानुसार शोषण एवं उत्पीड़न है।
आप सभी से आग्रह है कि इस याचिका पर sign कर कर के एक सन्देश दें, सरकार को एवं आम जनता को, कि हमें हमारा संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए और हमारा शोषण बंद हो।

"कामयाबी का राज"

‬: मशहूर पाकिस्तानी लेखक मरहूम अशफ़ाक़ अहमद लिखते हैं :
रोम (इटली) में मेरा चालान हुआ। बिज़ी होने की वजह से फीस वक़्त पर जमा ना कर सका।
जिसकी वजह से कोर्ट जाना पड़ा। 
जज के सामने पेश हुआ तो उनहोने वजह पूछी ? 
मैंनें कहा प्रोफ़ेसर हूँ मसरूफ ऐसा रहा के वक़्त ही ना मिला 
इस से पहले के मैं बात पूरी करता जज ने कहा 
*"A TEACHER IS IN THE COURT"* और सब लोग खड़े हो गए और मुझ से माफ़ी मांग कर चालान कैंसिल कर दिया। 
उस रोज़ मैं उस मुल्क की कामयाबी का राज़ जान गया !

कविता

*गुरु थे, कर्मचारी हो गए हैं ।*
*दांतों फंसी सुपारी हो गए हैं ।।*
*महकमा सारा हमको ढूँढता है।*
*हम संक्रामक बीमारी हो गए हैं ।।*
*इसे चमचागिरी की हद ही कहिये।*
*कई शिक्षक अधिकारी हो गए हैं ।।*
*अब वे अकेले कईयों को नचाते हैं ।*
*और हम टीचर से मदारी हो गए हैं ।।*
*उन्हें अब चाक डस्टर से क्या मतलब ।*
*जो ब्लॉक/संकुल प्रभारी हो गए हैं ।।*
*कमीशन इसमें,उसमें, इसमें भी दो।*
*हम दे-दे कर भिखारी हो गए हैं ॥*
*मिला है MDM का चार्ज जबसे ।*
*गुरुजी भी भंडारी हो गए हैं ॥*
*बी ई ओ ऑफिस को मंदिर समझ कर ।*
*कई टीचर पुजारी हो गए हैं ॥*
*पढ़ाने से जिन्हें मतलब नहीं है ।*
*वो प्रशिक्षण प्रभारी हो गए हैं ॥*
*खटारा बस बनी शिक्षा व्यवस्था ।*
*और हम लटकी सवारी हो गए हैं ।।* 
*स्कूलों में पढ़ाने नहीं दे रही सरकार ।* *केवल डाक देने वाले डाकिया हो गये ।।*
*हक की लड़ाई लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है ।* 
*शिक्षक अब गुरु नहीं रहे केवल सरकारी गुलाम रह गए ।।*
*अब विभाग ई-अटेंडेंस से हमारी निगरानी करेगा ।* 
*मानो हम "शिक्षक" नहीं, "मोस्ट वांटेड अपराधी" हो गए ।।*


                                                              By:- sharfe