Sunday, 19 February 2017

समान काम समान वेतन



'समान काम समान वेतन' सभी कर्मचरियों का संवैधानिक अधिकार है। 26 अक्टूबर 2016, को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी प्रकार के कर्मचारी, चाहे वो स्थायी हों या अस्थायी, यदि वो समान काम करते हैं तो उन्हें समान वेतन मिलना चाहिए। लेकिन अफ़सोस की बात है कि बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले की अवहेलना कर रही है।
बिहार सरकार ने विभिन्न प्रक्रियाओं से पिछले डेढ़ दशक में बिहार में लगभग 4 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की है। ये शिक्षकों एक समान परिस्थितियों में एक समान कार्य करते हैं लेकिन इनके वेतन में  भारी असमानता है। जहाँ एक शिक्षक को 50-60 हज़ार रूपए वेतन मिलता है वहीँ दूसरे शिक्षक को मात्र 12 हज़ार रूपए। ये न केवल संवैधानिक अधिकारों का हनन है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के कथनानुसार शोषण एवं उत्पीड़न है।
आप सभी से आग्रह है कि इस याचिका पर sign कर कर के एक सन्देश दें, सरकार को एवं आम जनता को, कि हमें हमारा संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए और हमारा शोषण बंद हो।

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